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जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत का पलड़ा भारी

जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत का पलड़ा भारी

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हरारे 9 जुलाई (एनपी)। जिम्बाब्वे के खिलाफ शुक्रवार से शुरू हो रही 3 मैचों की वनडे श्रृंखला में भारत की बेंच स्ट्रेंथ की आजमाइश होगी जबकि युवा और कुछ सीनियर खिलाड़ी इस मौके को भुनाने की फिराक में होंगे। बांग्लादेश के हाथों श्रृंखला की हार झेलने के बाद भारतीय टीम का यह पहला दौरा है और अब वह  विरोधी को हलके में लेने की गलती नहीं करेगी चूंकि जिम्बाब्वे ने पिछले कुछ अर्से में अच्छा प्रदर्शन  किया है। सीनियरों की गैरमौजूदगी में कप्तानी संभालने वाले युवा बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे को भी चयनकर्ताओं के  भरोसे पर खरा उतरना है। उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ आखिरी 2 वनडे में टीम से बाहर कर दिया गया  था और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने इस फैसले को सही साबित करते हुए कहा था कि वे धीमी पिचों पर  स्ट्राइक रोटेट करने में नाकाम रहे हैं। रहाणे ने आलोचना को सकारात्मक ढंग से लिया लेकिन जिम्बाब्वे में भी उनका सामना
क्या धोनी-कोहली विवाद का हल हैं रहाणे?

क्या धोनी-कोहली विवाद का हल हैं रहाणे?

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नई दिल्ली 9 जुलाई (एनपी)। बीसीसीआई ने जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम इंडिया का ऐलान कर दिया। क्रिकेटप्रेमी उम्मीद कर रहे थे कि इस दौरे के लिए विराट कोहली को कप्तान बनाया जा सकता है, लेकिन चयन समिति ने सबको चौंकाते हुए अजिंक्य रहाणे को कप्तान बना दिया। बांग्लादेश दौरे पर हार के बाद कोहली-धोनी के विवाद की खबरें भी आ रही थीं। बीसीसीआई शायद धोनी-कोहली विवाद को भारत में ही सुलझाना चाहती है। बांग्लादेश दौरे पर अंतरिम कोच बनकर गए रवि शास्त्री भी इस दौरे में टीम इंडिया के साथ नहीं रहेंगे। बताया जा रहा है कि उनका स्काय स्पोटर््स के साथ अनुबंध है, इस कारण वे टीम के साथ नहीं रहेंगे। रविन्द्र जडेजा, रोहित शर्मा को भी टीम में नहीं रखा गया है।  धोनी और कोहली के बाद रोहित शर्मा को ही टीम इंडिया के कप्तान के अगले विकल्प के रूप में देखा जा रहा था। धोनी के पसंदीदा रविन्द्र जडेजा को भी टीम में स्थान नहीं मिला ह
दक्षिण एशियाई खेलों पर राष्ट्रमंडल खेलों की छाया

दक्षिण एशियाई खेलों पर राष्ट्रमंडल खेलों की छाया

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नई दिल्ली (एनपी)। भ्रष्टाचार का अड्डा बने 2010 राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जरनैल सिंह को इस साल 10 से 20 दिसंबर तक गुवाहाटी और शिलांग में होने वाले 12वें दक्षिण एशियाई खेलों (सैग) की आयोजन समिति का महासचिव बनाया गया है। 2010 में दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में भ्रष्टाचार को लेकर तत्कालीन संप्रग सरकार पर जमकर हमले हुए थे। यही नहीं राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी और महासचिव ललित भनोट सहित कई लोगों को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। हालांकि जनरैल सिंह पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है लेकिन उनके सीईओ रहते हुए घोटाले को रोका नहीं जा सका। इस समिति के अध्यक्ष केंद्रीय खेल मंत्री सर्बानंद सोनोवाल हैं और इसकी पहली बैठक उनकी अध्यक्षता में ही नौ जुलाई को जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम स्थिति भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के दफ्तर में होगी। भारतीय ओ
पांच सेटों के संघर्ष के बाद क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचे जोकोविच

पांच सेटों के संघर्ष के बाद क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचे जोकोविच

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लंदन(एनपी)। शीर्ष वरीय नोवाक जोकोविक को विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट के पुरुष सिंगल्स क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने से पहले अपनी तीखी सर्विस के लिए मशहूर केविन एंडरसन के खिलाफ आखिरी सेट में भी कुछ विषम पलों से गुजरना पड़ा। जोकोविक ने लगभग पौने चार घंटे तक चला मुकाबला 6-7, 6-7, 6-1, 6-4, 7-5 से जीता। रोशनी कम होने के कारण सोमवार को यह मैच पूरा नहीं हो पाया था। तब इसके चार सेट हो चुके थे, जिसमें दोनों खिलाड़ी दो-दो सेट जीतकर बराबरी पर थे। लगातार दूसरे वर्ष विंबलडन के ग्रास कोर्ट पर चौथे दौर में प्रवेश करने वाले एंडरसन ने टाईब्रेकर में शुरुआती दो सेट जीतकर खलबली मचा दी थी। जोकोविक ने हालांकि जोरदार वापसी करते हुए अगले दो सेट जीतकर मैच को निर्णायक पांचवें सेट में धकेल दिया। सर्बियाई खिलाड़ी जोकोविक को दक्षिण अफ्रीका के 14वें वरीय एंडरसन के खिलाफ पांचवें सेट में भी जूझना पड़ा। जोकोविक को मंगलवार को
दफ्तर के साथ खेल मैदान में लगानी होगी हाजिरी

दफ्तर के साथ खेल मैदान में लगानी होगी हाजिरी

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चंडीगढ़, 05 जुलाई (एनपी)।  हरियाणा में खेल कोटे से नौकरी पाने वाले खिलाडिय़ों की मुश्किलें अब बढऩे वाली हैं। मुक्केबाज विजेंद्र सिंह के पेशेवर खिलाड़ी बनने के बाद सरकार खेल कोटे से मिलने वाली नौकरियों के नियमों में बदलाव करने जा रही है। खेल मंत्री अनिल विज ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। सरकार का निर्णय वाकई में उन खिलाडिय़ों की चिंता बढ़ाने वाला है, जो सरकारी नौकरी पाकर खेलना छोड़ देते हैं। नए नियमों के मुताबिक खिलाडिय़ों को दफ्तर की तरह ही खेल के मैदान में भी हाजिरी लगानी होगी। वे नौकरी मिलने के छह वर्ष बाद तक मैदान में आना नहीं छोड़ सकते। खेल कोटे से नौकरी इसलिए दी जाती है ताकि वे खेल को बढ़ावा देने के लिए अपना योगदान दें। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। सरकार बहुत जल्द खेले कोटे में सरकारी नौकरियां पाने वाले खिलाडिय़ों के लिए नियमों में बदलाव करने जा रही है। अब खिलाडिय़ों को नौकरी मिलने के