चीन के समकक्ष आने के लिये हर राज्य में अकादमियों की जरूरत: प्रकाश पादुकोण

मुंबई,15 दिसंबर (एनपी)। महान बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण का मानना है कि चीन के समकक्ष आने के लिये भारत को हर राज्य में बैडमिंटन अकादमियों की स्थापना करनी होगी ताकि प्रतिभाओं को तलाशा और तराशा जा सके। भारत में फिलहाल दो मशहूर अकादमियां हैं जिनमें दो दशक पुरानी बेंगलूरू स्थित प्रकाश पादुकोण अकादमी और हैदराबाद में पुलेला गोपीचंद अकादमी शामिल है। इसके अलावा एक अकादमी लखनऊ में है। पादुकोण ने प्रेस ट्रस्ट को दिये इंटरव्यू में कहा, ‘हमें और अकादमियों की जरूरत है। दीर्घकाल में हमें 30 अकादमियां चाहिये ताकि चीन के समकक्ष आ सकें। हमारे पास प्रतिभा की कमी नहीं है। हर राज्य में एक अकादमी होनी चाहिये जिसका संचालन योग्य और समर्पित कोच करें। उन्होंने कहा, ‘खिलाड़ी देश भर से आते हैं लेकिन लखनऊ को छोड़कर उत्तर भारत में कोई अकादमी नहीं है। सरकार विदेशी कोचों पर भी खर्च कर रही है। उन्होंने कहा, यदि हर राज्य में एक अकादमी नहीं हो सकती तो साइ को पूर्वोत्तर समेत छह जोन में एक एक अकादमी खोलनी चाहिये। लेकिन सबसे जरूरी है कि उन्हें चलाने के लिये सही व्यक्ति हो। साइ के पास अच्छे कोच है जिनमें से चुनकर उनका सहयोग करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा, ‘हम जोनल या राज्य अकादमियों से प्रतिभाओं को चुनकर बेंगलूरू, हैदराबाद या लखनऊ में प्रशिक्षण दे सकते हैं। यही सही तरीका होगा। पादुकोण ने कहा कि जूनियर स्तर पर देश में प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन उन्हें सही प्रशिक्षण की जरूरत है ताकि भविष्य में वे विश्व स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा, ”जूनियर स्तर पर कई खिलाड़ी हैं, खासकर लड़के जिनमें काफी क्षमता है जो पांच से आठ साल में विश्व स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। सिरिल वर्मा अच्छा खेल रहा है और विश्व जूनियर्स फाइनल में पहुंचा। लक्ष्य सेन और चिराग सेन भी हैं। उन्होंने बैडमिंटन लीग के नये अवतार प्रीमियर बैडमिंटन लीग का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि यह नियमित तौर पर आयोजित होगा। पादुकोण ने कहा, ‘यह खेल के लिये अच्छा है। मुझे उम्मीद है कि यह हर साल होगा और बीच में कोई ब्रेक नहीं आयेगा। पहले साल में यह काफी कामयाब रहा और इससे खेल को भी मदद मिली। पता नहीं फिर दो साल क्यों नहीं हुआ। पिछले आयोजकों और बाइ के बीच कुछ मसले थे। उम्मीद है कि ये मसले फिर नहीं आयेंगे और आये भी तो सुलझा लिये जायेंगे।