नक्सली आड़ लेकर करोड़ों का चाँवल बेच खाया, नमक कूड़े में

  •  चिंतलनार से ३ किमी दूर कोत्तागुड़ा मार्ग पर फेंक दिया सरकारी अमृत नमक
    सुकमा, 05 जुलाई (एनपी)। सुकमा जिला के चिंतलनार में राशन माफियाओं ने नक्सलियों की दहशत की आड़ में गरीबों को दिया जाने वाला सरकारी सस्ता अनाज खुले बाजार में बेच खाया। वहीं बचा सरकारी अमृत नमक को कूड़े में फेंक दिया और सरकारी रिकार्ड में चाँवल, शक्कर, मिट्टीतेल व नमक को शत-प्रतिशत बाँट दिया। राशन दुकान संचालक यह बोलने से भी बाज नहीं आ रहे हैं कि ग्रामीणों को सरकारी नमक रास नहीं आ रहा है। जबकि ग्रामीणों ने बताया कि खाने के लिए चाँवल ही नहीं है तो मुफ्त नमक का क्या करेंगे ?
    ग्रामीणों ने बताया कि चिंतलनार-कोत्तागुड़ा मार्ग पर जंगल में नमक की बोरियाँ कचरे के ढेर में फेंकी गई है. इन्वेस्टीगेशन किया तो सामने आया कि ये बोरियाँ राज्य सरकार द्वारा जरूरतमंदों को मुफ्त में दिय जाने वाले अमृत नमक की हैं. मौके पर कई बोरियाँ पड़ी हैं. आस-पास के लोगों से पूछा गया तो उन्होने बताया कि चिंतलनार में संचालित राशन दुकान के संचालकों द्वारा फेंका गया है.
    राशन दुकान संचालकों व उनसे जुड़े राशन की हेराफेरी करने वाले लोगों ने चिंतलनार व चिंतागुफा इलाके के लगभग दो दर्जन गाँवों में यह अफवाह फैलाई है कि नक्सलियों ने सरकारी सस्ता अनाज राशन दुकानों से नहीं लेने का फरमान जारी किया है. इस तरह के अफवाह को बढ़ावा देने में चिंतलनार व चिंतागुफा में रहने वाले गौर आदिवासी व्यापारी भी शामिल हैं. ऐसा करने से उनकी अपनी दुकानदारी भी चलती रहती है. राशन की कालाबाजारी करने में इन व्यापारियों की भी महत्तवपूर्ण भूमिका होती है. इस इलाके में संचातिल २१ दुकानों के लिए पिछले एक साल में लगभग ५० हजार च्ंिटल चांवल, १२ हजार क्ंिवंटल शक्कर, नमक २४ हजार च्ंिटल नमक एवं २४ हजार क्ंिवटल चना का उठाव किया जाना बताया गया है. विभाग के जिम्मेदार बीते एक साल का सही-सही आँकड़ा देने से बच रहे हैं.
    मुफ्त में देना है नमक
    छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश के सभी बीपीएल, अंत्योदय, अन्नापूर्णा एवं मुख्यमंत्री खाद्यान सहायता योजना के कार्डधारियों को अमृत नमक दिया जाता है. प्रत्येक कार्डधारी को दो किलो नमक प्रति माह मुफ्त दिए जाने का प्रावधान है.
    वनोपज के बदले ग्रामीणों ले रहे सरकारी चाँवल
    कोन्टा विकासखण्ड के अंदरूनी इलाकों में संचालित राशन दुकानेां में राशन नहीं मिलने की वजह से ग्रामीण वनोपज के बदले राशन ले रहे हैं. अंदरूनी इलाकों में लगने वाले सप्ताहिक बाजारों में व्यापारियों द्वारा चाँवल को वनोपज के साथ अदला-बदली किया जाता है. शनिवार को चिंतलनार में लगने वाले सप्ताहिक बाजार में भी ऐसे नजारें देखने मिलने जहाँ बड़ी संख्या में ग्रामीण चाँवल खरीद रहे थे. टोरा की कीमत १६ से १८ रूपये किलों हैं वहीं महुआ की २० से २२ रूपये की बच व्यापारियों द्वारा खरीदा जाता है. एक किलो टोरा के बदले एक किलों चाँवल लेते हैं इसमें भी व्यापारी डंडी मारने से नहीं चूकता है.
    कालाबाजारियों को प्रशासन का संरक्षण प्राप्त-रामा सोढ़ी
    भातरीय कम्युनिष्ट पार्टी के सुकमा जिला सचिव रामा सोढ़ी ने कहा कि चिंतलनार और चिंतागुफा इलाके में हो रही राशन की कालाबाजारी को लेकर पार्टी द्वारा जिला प्रशासन को अवगत कराया गया था. उसके बावजूद आज पर्यंत किसी तरह की कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा नहीं की गई है. इसके अलावा ३ नंवबर २०१४ को कोन्टा विकासखण्ड ग्राम पंचायत पालाचलमा, सिंगारम, सिलगेर, डब्बाकोन्टा, मेहता, गोंदपल्ली एवं केरलापेंदा में १३ वें वित्त, मूलभूत एवं इंदिरा आवास योजना के तहत किये गये फर्जीवाड़े की जांच की मांग की गई थी जो आज तक अधूरी है. इतनी शिकायतों के बाद भी कार्यवाई नहीं करना जिला प्रशासन के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं।

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