जेट एयरवेज का भी होगा किंगफिशर वाला हाल? आइए जानते हैं क्या चल रहा है कंपनी के अंदर…

नई दिल्ली। देशी एयरलाइन कंपनी जेट एयरवेज वित्तीय संकट से गुजर रही है। यह देश की सबसे पुरानी एयरलाइन कंपनी है जो अभी संचालन में है। आशंका है कि कैश की कमी के कारण कंपनी को अपनी उड़ानें बंद करनी पड़े। आइए जानते हैं क्या चल रहा है कंपनी के अंदर…
60 दिन का खर्चा
कंपनी लागत कम करने के लिए अपने पायलटों एवं अन्य स्टाफ को उनकी सैलरी घटाने की बात कही है। जेट एयरवेज का कहना है कि उसके पास महज दो महीने तक के संचालन के लिए जरूरी पैसे ही पड़े हैं। कंपनी ने स्टाफ्स से कहा है कि अगर वे नहीं चाहते हैं कि कंपनी बंद हो और उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़े तो सैलरी कम करवाने पर राजी हो जाएं।
राजी नहीं हैं पायलट
जेट एयरवेज ने पायलटों को दो वर्षों तक 15 प्रतिशत कम सैलरी पर काम करने को कहा। कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि अगर पायलट सैलरी घटाने पर सहमत हुए तो किसी भी पायलट को निकाला नहीं जाएगा। पायलटों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, हालांकि उनके यूनियन ने मैनेजमेंट को वित्तीय संकट से बाहर निकलने में मदद करने की सलाह दी है।
बैंकों से झटका
जेट एयरवेज ने वर्किंग कैपिटल लोन (संचालन के लिए जरूरी पूंजी हेतु कर्ज) का आवदेन दिया, लेकिन बैंकों ने उसके सामने कड़ी शर्त रख दी। बैंकों का कहना है कि जेट एयरवेज पर पहले से ही 8,150 करोड़ रुपये का कर्ज है। इन बैंकों में कई ने विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइन को भी लोन दिया था।
बदनामी का तमगा
जेट एयरवेज पर इस वर्ष देश की सभी एयरलाइनों में लगातार दो महीने सबसे लेट-लतीफ होने का दाग भी लग चुका है। हालांकि, कंपनी ने जून महीने में इंडिगो और स्पाइसेजट के बाद सही समय पर चलनेवाली तीसरी सबसे अच्छी एयरलाइन का खिताब भी हासिल किया।
60 दिनों की बात खारिज
जेट एयरवेज ने स्टॉक एक्सचेंज को दिए गए स्पष्टीकरण में 60 दिन तक के ही संचालन क्षमता की बात को खारिज कर दिया। हालांकि, उसने यह जरूर माना कि पायलटों और इंजिनियरों पर वेतन में कटौती का दबाव बनाया गया है।
वक्त-वक्त का फेर
जेट एयरवेज का वक्त वाकई सही नहीं बीत रहा। इसकी एक फ्लाइट रियाद के रनवे से उड़ान भरने में असफल रही, हालांकि इसमें सवार यात्री और क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित रहे।

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