राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर नहीं होगा ओआरओपी का असर

नई दिल्ली, 08 सितंबर (एनपी)। ‘वन रैंक, वन पेंशन लागू करने संबंधी सरकार के फैसले का राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर असर नहीं पड़ेगा। पूर्व सैनिकों के लिए ओआरओपी को लागू करने पर चालू वित्त वर्ष में करीब 10,000 करोड़ रुपये व्यय आने का अनुमान है। हालांकि केंद्र की राजकोषीय स्थिति इस भार को उठाने में सक्षम है। जापानी वित्तीय सेवा सलाहकार नोमूरा का कहना है कि ओआरओपी से राजकोषीय घाटे का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 3.9 प्रतिशत से डगमगाने की उम्मीद नहीं है। पेट्रोलियम उत्पादों और उवर्रक सब्सिडी कम करने तथा अप्रत्यक्ष कर संग्रह बजट अनुमान की तुलना में अधिक होने के कारण ओआरओपी का असर खजाने पर नहीं पड़ेगा। उधर वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने भी भरोसा दिया है कि वन रैंक वन पेंशन का खर्च राजकोषीय संतुलन को नहीं बिगाड़ेगा। उल्लेखनीय है कि सरकार ने पिछले हफ्ते ही ओआरओपी पूर्व प्रभाव से एक जुलाई 2014 से लागू करने का फैसला किया है। चालू वित्त वर्ष में एरियर जारी होने से खजाने पर लगभग 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये व्यय होगा जबकि अगले वित्त वर्ष से 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये व्यय आएगा।
नोमुरा का कहना है कि पेंशन देयता बढऩे, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने और बैंकों में पूंजी बढ़ाने के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष से आगे भी राजकोषीय संतुलन बिठाने की जरूरत पड़ेगी। सरकार को वित्त वर्ष 2017-18 तक राजकोषीय घाटा जीडीपी के तीन प्रतिशत के बराबर लाना है। इस बीच सिन्हा का कहना है कि ओआरओपी का खर्च उठाने के लिए सरकार के पास राजकोषीय गुंजाइश है। सरकार ने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते ही फैसला किया है।