गांव के जुटाए चंदे से बना मंदिर, मेले में झूमे चौरासी गांव के लोग

  • रश्म आदायगी के बाद शुरू होती है यात्रा
    धीरेन्द्र तिवारी
    नकुलनार (एनपी)। दन्तेवाड़ा जिले के ग्राम मैलावाड़ा में मंदिर बनाने पूरे गांव ने चंदा दिया। और चालीस लाख रुपये जुटाकर भव्य मंदिर बना डाला। गांव में देवी गंगनादई की पूजा करने चौरासी गांव के लोग जुटे। और देवी के बने भव्य मंदिर को देखकर जश्न मनाते हुए खूब झूमे। कुआकोंडा क्षेत्र के चौरासी गांव के लोग अपने गांव के देवताओ संग पहुंचे और सुबह से शाम तक ढोल नगाड़ों की धुन पर झूमते रहे। मेले में मंदिर को देखने इन गांवों के हजारों लोग पहुंचे थे। मेले में लोगो की भीड़ देखकर ही आंकलन लगाया जा सकता है कि मंदिर को देखने लोग काफी उत्साह से पहुंचे थे।
    गड़पदर मे आंगादेव की रश्म आदायगी के बाद शुरू होती है जात्रा।
    कुआकोंडा विकासखण्ड में गड़पदर में आंगादेव की पूजा के बाद क्षेत्र में जात्राओ का दौर चालू हो जाता है। यहाँ देवता के सारे रश्म पूरे किए जाते है। हर साल अप्रैल माह के दूसरे शनिवार को गड़पदर से जात्रा की शुरुआत होती है। वही मंगलवार को पूजारीपारा में परम्परागत तरीके से पूजा अर्चना कर देवी से क्षेत्र की खुशहाली हेतु आशीर्वाद मांगते है। इसके बाद बुधवार को चौरासी गांव के सभी देवी देवता मैलावाड़ा पहुंचकर माता गंगनादई की पूजा में शामिल होते है। और रश्म आदायगी कर जश्न मनाते है।
    मंदिर बना गांव ने पेश की मिशाल
    ग्राम मैलावाड़ा में बने मंदिर को बनाने यहां के लोगो ने चार साल पूर्व ही समूचे ग्राम में शराब बंदी कर दी थी। इस गांव में शराब बेचने, बनाने व पीने वाले पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगाया जाता रहा है। जिससे गांव के अधिकांश शराब पीने वाले लोगो ने शराब छोड़कर मंदिर बनाने सहयोग किया। गांव के हर घर से प्रति व्यक्ति ने छ: सौ रुपये चंदे स्वेच्छा से मंदिर बनाने दिया। वही नौकरी करने वाले लोगो ने एक माह का वेतन चंदे के रूप दान कर दिया। यहां तक कि गर्भवती माताओ की गर्भ में पल रहे शिशु को दुनिया में आने के बाद छह सौ रुपये चंदे के तौर पर परिजनों ने देने मंशा बनाई थी। और इसके परिणाम स्वरूप ग्राम में दो साल में माता का भव्य मंदिर बन कर तैयार हो चुका है। जिसमे नवरात्रि में माता प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा भी की जा चुकी है।