3 साल में 2122 लोगों ने रेल ट्रैक पर गंवाई जिंदगी

आगरा ,18 जनवरी (एनपी)। रेलवे के लिए ट्रैक दुर्घटना चिंता का एक प्रमुख विषय बनी हुई है। आगरा डिविजन में पिछले 3 वर्ष में कुल 2122 लोगों ने ट्रैक पर अपनी जिंदगी गवाई। इसमें से 70 प्रतिशत मामले ऐसे हैं जहां ट्रेन के सामने आने से लोगों की मौत हो गई।
रेलवे पुलिस से प्राप्त डेटा के अनुसार 2016 में 688 लोगों ने ट्रैक पर जान गंवाई। वहीं 2015 में 697 और 2014 में 737 ऐसे मामले सामने आए। इसमें आत्महत्या, रेलवे क्रॉसिंग दुर्घटना, ट्रेन से गिरना आदि शामिल हैं।
जीआरपी के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा, सबसे अधिक दुर्घटना तेज गति से आ रही ट्रेन के सामने आकर कुचले जाने की वजह से होती है। घनी आबादी वाले इलाकों में फेंसिंग लाइन (बाड़ा) का ना होना भी दुर्घटना की वजह बनता है। पिथले 3 साल में 1514 लोग ट्रैक दुर्घटना का शिकार बने हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे के पास कई करोड़ मूल्य की तारें, लोहे और अन्य मैटेरियल बेकार ही ट्रैक और स्टेशनों पर पड़े हुए हैं। इनकी मदद से आबादी वाले इलाकों में फेंसिंग लाइन बनाई जा सकती हैं, जहां सबसे अधिक दुर्घटना होती है।
जीआरपी के अनुसार अलीगढ़ के आसपास के इलाकों में हुई मौतों की बड़ी वजह ट्रैक के पास की जमीनों पर अतिक्रमण है। वहीं टुंडला से शिकोहाबाद के बीच सबसे अधिक आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। जबकि राजा की मंडी और बिलौचपुरा में शॉर्टकट के चक्कर में सर्वाधिक जानें गईं।
पिछले वर्ष जनवरी में मथुरा में कोसीकलां के पास सेल्फी लेने के चक्कर में तीन स्टूडेंट्स को अपने जान से हाथ धोना पड़ा था। पिछले 3 वर्षों में सेल्फी के चक्कर में कुल 16 मौत हुई है।
हृष्टक्रक्च के अनुसार यूपी पिछले 2 वर्षों में रेल दुर्घटनाओं के मामले में शीर्ष दो में रहा है।