आरबीआई का यू-टर्न : पुराने नोटों के जमा करने पर लगी रोक हटी

नई दिल्ली, 21 दिसंबर (एनपी)।  नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक नए नियम बनाने के साथ ही लागू नियमों को वापस लेने या उनमें संशोधन करने का भी रिकार्ड बना रहा है। इस दिशा में पांच हजार रुपये से ज्यादा नगदी जमा करने पर ग्राहकों से पूछताछ करने और 30 दिसंबर, 2016 तक 5,000 रुपये से ज्यादा सिर्फ एक बार पुराने नोट जमा करने संबंधी दिशानिर्देश को लागू करने के 48 घंटे के भीतर ही वापस ले लिया गया है। सोमवार शाम को यह नियम लागू किया गया और बुधवार दोपहर को वापस ले लिया गया। आम जनता अब 30 दिसंबर तक अपने खाते में मर्जी के मुताबिक पुराने नोट जमा करा सकती है। हां, यह नियम उन बैंक खातों के लिए लागू नहीं होंगे जिनका केवाईसी सत्यापन नहीं किया गया है। वहां 50 हजार रुपये की सीमा लागू रहेगी।वैसे तो यह नियम सिर्फ डेढ़ दिनों तक लागू रहा लेकिन इससे सरकार की न सिर्फ किरकिरी हुई बल्कि बैंकों पर काम काज का बोझ भी जबरदस्त तौर से बढ़ा। सबसे ज्यादा दिक्कत आम जनता को दिक्कतों को झेलनी पड़ी। इस नियम के लागू होने पर कांग्रेस ने तो सिर्फ सरकार को कटघरे में खड़ा किया ही, नोटबंदी पर सरकार का अभी तक समर्थन कर रहे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी आलोचना करने से नहीं चूके। माना जा रहा है कि इस नियम को वापस कराने में वित्त मंत्रालय की अहम भूमिका रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नियम लागू होने के दिन ही अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा था कि जनता से कोई पूछताछ नहीं होगी। हालांकि बैंकों ने मंगलवार को ग्राहकों से पूछताछ करने के बाद ही पांच हजार से ज्यादा के पुराने नोटों को जमा करने की इजाजत दी।आरबीआइ की तरफ से बुधवार को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सोमवार को उनकी तरफ से जारी अधिसूचना के पहले दो बिंदु वापस लिये जा रहे हैं। इसमें एक बिंदु यह था कि 30 दिसंबर, 2016 तक हर बैंक ग्राहक को अपने खाते में 5,000 रुपये से ज्यादा की राशि के 500 और एक हजार रुपये के पुराने नोट सिर्फ एक बार जमा कराने की अनुमति होगी। लेकिन यह राशि तभी जमा की जाएगी जब ग्राहक से बैंक के दो अधिकारी पूछताछ करेंगे। इसमें यह भी था कि ग्राहक से पूछताछ ऑन रिकार्ड होगी।
दूसरा बिंदु यह था कि अगर पांच हजार से कम राशि कई बार में जमा करायी जाती है तो कुल योग पांच हजार रुपये से अधिक होने पर भी ग्राहक से पूछताछ की जाएगी। इस दिशानिर्देश के तहत ग्राहकों से पूछा गया कि वह अभी तक पुराने नोट क्यों नहीं जमा करा पाये? इस निर्देश का यह असर हुआ था कि कई बैंकों ने तो आम जनता से राशि जमा करनी ही बंद कर दी थी क्योंकि उनके पास पूछताछ करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारी नहीं थे।