बस्तर दशहरा: अव्यवस्थाओंं का पर्याय बन गयी है ऐतिहासिक काछनगुड़ी

जगदलपुर, 21 सितम्बर (एनपी)। 11 अक्टूबर को दशहरा पर्व पूरे बस्तर जिले में धूम-धाम से मनाया जाएगा, लेकिन अभी तक काछनगुड़ी में सुविधाएं नहीं के बराबर है। पथरागुड़ा स्थित काछनगुड़ी में हालांकि सफाई व रंगरोगन कार्य शुरू किया गया है। पानी के अभाव में सफाई कामगारों को यहां परेशानी हो रही है तथा सात दिनों पूर्व उपवास रखकर साधना करने वाली कुंवारी कन्या के लिए यहां कोई सुविधा नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता यहां ढंग का शौचालय तक नहीं है। कमरे से बेहद दूर इस शौचालय की स्थिति जर्जर है। वहीं यहां नल आदि का अभाव होने के कारण पानी की कमी से दो-चार होना पड़ेगा।  गौरतलब है कि दशहरा पर्व में लाखों रूपये खर्च किये जाने के बावजूद पर्व को संचालित करने वाले व इससे जुड़े हजारों ग्रामीणों को आखिर सुविधाएं क्यों नहीं मिल पाती है यह एक प्रश्न है। इन तमाम गरीब ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं तो दी जानी चाहिए काछनगुड़ी में शौचालय व पानी की नितांत आवश्यकता है। ज्ञात हो की बेल के कांटों से तैयार झूले में बैठकर रथ परिचालन व पर्व की अनुमती देने वाली काछनदेवी जिस कुंवारी कन्या पर सवार होती है। वह काछनगुड़ी में सात दिनों तक रहती है तथा वहां विशेष पूजा अर्चना होती है।  काछनगुड़ी के चारों ओर सुरक्षित चारदीवारी न होने के कारण कन्या की सुरक्षा को लेकर भी खतरा है। बदलते समय के साथ-साथ कुछ सुविधाएं भी ग्रामीणों को उपलब्ध कराना चाहिए। आस्था, श्रद्धा, विश्वास, सहकार और समरसता की भावना के साथ यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को मनाने में हजारों ग्रामीणों का सहयोग रहता है।  दहशरा पर्व को मनाने की अनुमति देने वाली काछनदेवी इस बार किस कुंवारी कन्या पर सवार होगी इसकी घोषणा नहीं की गई है। पिछले सात वर्षों से विशाखा पर काछनदेवी सवार होती आ रही है और इस विधान को सम्पन्न कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। इसके पूर्व विशाखा की मां और मौसी भी काछनदेवी के रूप में कांटों के झूले पर बैठ चुकी हंै। इस वर्ष काछनदेवी कौन होगी यह घोषणा अभी तक नहीं हुई है।