मोतिनपुर के ग्रामीणों ने किया आदिवासी परिवार का हुक्का पानी बंद

  •  आस्था अभियान के तहत ग्रामीणों को दी गई समझाईश
  •  प्रार्थी ने लगाया मानव अधिकार व आईजी से गुहार
    कवर्धा/बोड़ला 28 अगस्त (एनपी)। कवर्धा जिले के बोड़ला के समिपस्थ ग्राम मोतिनपुर में एक परिवार का हुक्का पानी बंद होने का मामला प्रकाश में आया है। ग्राम मोतिनपुर निवासी राधेश्याम गोड ने मानव अधिकार और आईजी से गुहार लगाई है कि मोतिनपुर के ग्रामीणों द्वारा उसके परिवार से भेदभाव कर प्रताडि़त किया जा रहा है। जिसकी शिकायत मानव अधिकार आयोग और आईजी से की है।
    ग्राम मोतिनपुर निवासी राधेश्याम पिता अंकलहा गोड 52 द्वारा मानव अधिकार आयो व आईजी से की गई है। पीडि़त ने अपने फरियाद में कहा कि14 वर्ष में उसने अपनी पुत्री का विवाह किया जिसमें पुरे गांव के ग्रामीणों को विवाह कार्यक्रम में आमंत्रित किया था। साथ सभी ग्रामवासियों के घर सुखा खाद्य सामग्री भी भिजवाया गया था। प्राथी का कहना है कि ग्रामीण परिवेश के मुताबिक वे ग्राम के प्राय: सभी घरों में स्वीकार किया गया। लेकिन तीसरे दिन गांव वालों ने यह कह कर मेरा निमंत्रण व सुखा खाद्य सामाग्री वापस कर दिया गया कि 10 वर्ष पहले तुम्हारे द्वारा 10 हजार रूपए की दंड नहीं दी गई है। पीडि़त ने बताया कि वह एक गरीब आदिवासी व्यक्ति है वह इतनी बड़ी रकम देने में सक्षम नहीं है। तब से लेकर आज तक ग्रामीणों द्वारा मेरा हुक्का पानी बंद कर दी गई है। जिससे मुझे व मेरे परिवार को मोतिनपुर में मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताडि़त किया जा रहा है।
    राधेश्याम की शिकायत पर बोड़ला पुलिस द्वारा शनिवार को मोतिनपुर के ग्रामीणों को बुलाया गया। थाना प्रभारी नरेन्द्र पुजारी ने ग्रामीणों से भी पुछताछ की। सामाजिक बहिष्कार जैसे आरोपों को ग्रामीणों ने सिरे खारिज किया और बताया कि ग्राम मोतिनपुर में कभी किसी परिवार को सामाजिक बहिष्कार नहीं किया है।
    उक्त झगड़ा राधेश्याम व उनके परिवार में भूमि विवाद को लेकर हुई है। इसमें ग्रामीणों का कोई भूमिका नहीं है। बयान होने के बाद टीआई श्री पुजारी ने ग्रामीणों को गांव में भाईचारे के रहने की समझाईस दी। श्री पुजारी ने समाज में फैले कुरितियों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने गांवों में अपराधों को टालने के लिए ग्रामीणों को अनेक टिप्स भी बताए। साथ ही ठगी रोकने के नुस्के भी सुझाए। इस मौके पर ग्रामीणों को थाना भ्रमण कराया गया। इसके अलावा गांव में बैठ कर प्रार्थी रामेश्वर गोड़ के विषय में चिंतन करने की बातें कही गई। जिससे समाज में ऊंच-निच का भेदभाव न हो और गांव में किसी गरीब परिवार को उनके अधिकार से वंचित न होना पड़े। इस समझाईस को सहर्ष स्वीकार करते हुए ग्रामीणों ने प्रार्थी से अच्छे व्यवहार करने की बात कही।