महानदी के पानी के उपयोग को लेकर ओडिशा की घटनायें राजनीति प्रेरित-बृजमोहन

ओडिशा सरकार राजनीतिक फायदे के लिए वहां की जनता को कर रही गुमराह
ओडिशा की जनता को चिंतित होने की जरूरत नहीं :  बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर 04 अगस्त (एनपी)।  छत्तीसगढ के जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने महानदी के पानी के उपयोग को लेकर ओडिशा में चल रही घटनाओं को राजनैतिक प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार महानदी के पानी के उपयोग के संबंध में वास्तविक तथ्यों की अनदेखी कर ओडिशा की जनता को गुमराह कर रही है। ओडिशा सरकार की मंशा इस मामले को लेकर राजनैतिक फायदा लेने की है। छत्तीसगढ़ महानदी में औसत वार्षिक उपलब्ध जल का 3.5 प्रतिशत तथा ओडिशा 14 प्रतिशत पानी का उपयोग कर रहा है शेष 82.5 प्रतिशत पानी बहकर समुद्र में चला जाता है। ओडिशा सरकार को इस पानी के उपयोग के लिए कार्य योजना बनाकर किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
श्री अग्रवाल ने कहा कि ओडिशा में विगत 50 वर्षो में केवल हीराकुड बांध ही क्यों बनाया गया है, वहां की सरकारे ओडिशा के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कभी ठोस पहल नहीं की है। यह पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। श्री अग्रवाल ने ओडिशा की जनता और बुद्धिजीवियों से अपील करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ओडिशा के बीच हमेशा सौहाद्रपूर्ण संबंध रहा है। और यह हमेशा बना रहेगा। महानदी के पानी के लेकर ओडिशा की जनता को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। इस मामले में विवाद पैदा करने का कोई औचित्य नहीं है। श्री अग्रवाल ने कहा कि महानदी जल के बटवारे का किसी आंदोलन से कोई हल नहीं निकलेगा। छत्तीसगढ़ सरकार इस मामले में साझा बातचीत करने को तैय्यार है परंतु ओडिशा सरकार की इसमें कोई रूचि नहीं दिखाई दे रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने यहां के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रखी है। छत्तीसगढ़ सरकार  सिंचाई के लिए 27 स्ट्रक्चर बनाकर महानदी के पानी का नियमानुसार समुचित उपयोग कर रही है।
जल संसाधन मंत्री श्री अग्रवाल ने केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि हीराकुड बांध में पिछले 10 साल में पानी की कोई कमी नहीं है न ही भविष्य में इस तरह की समस्या आने वाली है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान महानदी में पानी बहकर समुद्र में जाता है उसके समुचित उपयोग के लिए ओडिशा सरकार को प्रयास करनी चाहिए।
श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ निर्माणाधीन केलो परियोजना जिसके बांध का कार्य पूर्ण हो चुका है के संबंध में जानकारी डी.पी.आर. (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की प्रति सहित ओडिशा सरकार के मुख्य अभियंता प्रोजेक्ट प्लानिंग एण्ड फार्मुलेशन भुवनेश्वर को कार्यपालन अभियंता केलो परियोजना सर्वेक्षण संभाग रायगढ़ ने 13 फरवरी 2008 को पत्र के माध्यम से भेजी है। मुख्य अभियंता प्रोजेक्ट प्लानिंग एण्ड फार्मुलेशन भुवनेश्वर ओडिशा द्वारा केलो परियोजना के डी.पी.आर. (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के अध्ययन पश्चात अपने पत्र क्र. 3351, दिनांक 10/04/2008 को इस परियोजना के स्पष्ट इण्डेक्स मेप की मांग की गई थी जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि ओडिशा सरकार को केलो परियोजना निर्माण के पूर्व वर्ष 2008 में ही जानकारी प्राप्त थी। ओडिशा के मुख्य सचिव का यह कहना भी सही नहीं है कि केलो परियोजना के संबंध में छत्तीसगढ़ से उन्हें कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। यह असत्य और गुमराह करने वाली बात है, छत्तीसगढ सरकार ने वर्ष 2006 और 2008 के अलावा अन्य कई बार इस संबंध में पत्र लिखा है। छत्तीसगढ़ सरकार के पत्रो की क्योरी भी ओडिशा सरकार द्वारा की गई है। इन पत्रों में केलो परियोजना के संबंध में पूरी जानकारी दी गई है। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता द्वारा ओडिशा के मुख्य अभियंता एवं जल संसाधन सचिव से मुलाकात कर केलो परियोजना के संबंध में जानकारी दी गई इसके भी प्रमाण उपलब्ध है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि तत्कालीन मध्यप्रदेश और ओडिशा राज्य के बीच 28 अप्रेल 1983 को हुए अनुबंध में एक संयुक्त नियंत्रण बोर्ड गठित कर दोनों राज्यों के माध्यम से सर्वेक्षण, अनुसंधान निष्पादन एवं अन्य मुद्दों के निपटारे के लिए किया जाना था। संयुक्त नियंत्रण बोर्ड का गठन अभी तक नहीं हुआ है। छत्तीसगढ़ संयुक्त नियंत्रण बोर्ड के गठन के लिए सहमति प्रदान कर चुका है।