मंत्रिपरिषद की बैठक : कई महत्वपूर्ण फैसले

रायपुर 1 मार्च (एनपी)। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक आज दोपहर यहां विधानसभा परिसर स्थित मुख्य समिति कक्ष में आयोजित की गयी। बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय इस प्रकार हैं-
सरगुजा जिले के ओला वृष्टि प्रभावित किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण राहत योजना 2015 का लाभ दिलाया जाएगा। यह राहत योजना सूखा प्रभावित किसानो के लिए पहले ही घोषित की जा चुकी है। ज्ञातव्य है कि सरगुजा जिले के अम्बिकापुर, लुण्ड्रा, लखनपुर और बतौली के 78 गांवों में 29 अक्टूबर 2015 को ओला वृष्टि के कारण खरीफ फसल प्रभावित हुई है। इन तहसीलों में ओला वृष्टि और अल्प वर्षा से कुल सात हजार 140 किसान प्रभावित हुए थे, जिन्हें आर.बी.सी. 64 के तहत मुआवजा दिया जा चुका है। अब 29 अक्टूबर 2015 की ओला वृष्टि से प्रभावित लगभग एक हजार 445 किसानों ने सहकारी समितियों से तीन करोड़ 53 लाख रूपए का ऋण लिया है। इनमें से 302 किसानों की ऋण राशि 80 लाख 32 हजार रूपए लिकिंग के माध्यम से वसूल हो चुकी है। इनकी ऋण माफी की 25 प्रतिशत राशि बीस लाख आठ हजार रूपए होती है। शेष किसानों के अल्पकालीन ऋणों को अल्पकालीन कृषि ऋण राहत योजना 2015ब्याज मुक्त मध्यकालीन ऋण में परिवर्तित किया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों और कर्मचारी के लिए दस हजार मकान बनाए जाएंगे। पुलिस हाऊसिंग कार्पोरेशन इनका निर्माण करेगा।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए राज्य माध्यमिक शिक्षा मिशन द्वारा पूर्व में संचालित 72 मॉडल स्कूलों को आगामी शिक्षा सत्र से सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पी.पी.पी.) मोड में संचालित किया जाएगा। यह योजना ‘मुख्यमंत्री आदर्श विद्यालय योजना के नाम से संचालित की जाएगी।  इन 72 में से 59 मॉडल स्कूलों के संचालन का दायित्व व्यावसायिक दृष्टिकोण से निजी संस्थाओ  के पास रहेगा। शेष 13 विद्यालय राज्य शासन द्वारा वेतन अनुदान एवं दस प्रतिशत संचालन राशि पर संचालित किए जाएंगे। इस योजना के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए जा चुके हैं, जिनके आधार पर इनके संचालन के लिए दस मार्च को संस्थाओं का चयन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रदेश के शैक्षणिक रूप से पिछड़े 74 विकासखंडों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए मॉडल स्कूल स्थापित किए गए हैं। केन्द्र द्वारा मई 2015 में औपचारिक रूप से योजना को राज्य शासन को हस्तांतरित कर दिया गया है। वर्तमान में इनमें 17 हजार 722 अध्ययनरत हैं।
इन 74 मॉडल स्कूलो मे से बोड़ला (जिला कबीरधाम) और कुसमी (जिला बलरामपुर) को छोड़कर शेष 72 का संचालन शिक्षा सत्र 2016-17 से निजी संस्थाओं के माध्यम से कराए जाने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में कक्षा छठवीं से बारहवीं तक इनमें अध्यापन की व्यवस्था है। अब सत्र 2016-17 से इनमें कक्षा पहली से बारहवीं तक निजी संस्थाओं के माध्यम से अध्यापन कार्य कराया जाएगा। योजना का संचालन मुख्यमंत्री आदर्श विद्यालय योजना के नाम से होगा। वर्तमान में इनमें कक्षा छठवीं से ग्यारहवीं तक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन विद्यार्थियों को बारहवीं तक उत्तीर्ण कराने की जिम्मेदारी निजी संस्थाओं की होगी। कुल 72 मॉडल स्कूलों में से 59 मॉडल स्कूलों के संचालन का दायित्व व्यावसायिक दृष्टिकोण से निजी संस्थाओं के पास रहेगा। शेष 13 विद्यालय राज्य शासन द्वारा वेतन अनुदान एवं 10 प्रतिशत संचालन राशि पर संचालित होंगे। इन 59 मॉडल स्कूलों में बच्चों के नामांकन में से 2/3 हिस्सा निजी संस्थाओं का होगा, जिसके लिए वो व्यावसायिक दर पर फीस निर्धारित कर सकेंगे। शेष 1/3 हिस्सा शासकीय कोटा का होगा, जिसमें 25 प्रतिशत बच्चों का नामांकन शिक्षा का अधिकार अधिनियम का होगा।
बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 13 मॉडल स्कूल का संचालन राज्य शासन की देख-रेख में किया जाएगा। इन विद्यालयों में सभी शिक्षकीय एवं गैर शिक्षकीय पदों पर कर्मचारियों को रखने की जिम्मेदारी निजी संस्था को दी जाएगी। इन 13 विद्यालयो के सभी बच्चों का दाखिला शासकीय कोटे से किया जाएगा। अत: विद्यालय संचालन के लिए एक मुश्त राशि प्रतिवर्ष अनुदान के रूप में निजी संस्था को दी जाएगी।
मंत्रिपरिषद ने आज की बैठक में चार विधेयकों के प्रारूप का अनुमोदन कर दिया, जिनमें छत्तीसगढ़ पंचायतराज अधिनियम 1993 (क्रमांक-1 सन 1994) की (धारा 36 संशोधन) विधेयक, छत्तीसगढ़ मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक 2016, छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 में (संशोधन) विधेयक 2016 और छत्तीसगढ़ राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंध (संशोधन) विधेयक 2016 शामिल हैं।