मंदी से उबरने के लिये रीयल एस्टेट क्षेत्र को मिले उद्योग का दर्जा

नई दिल्ली 21 जनवरी (एनपी)। मांग की कमी और आर्थिक सुस्ती से जूझ रहे रीयल एस्टेट क्षेत्र ने आगामी बजट में उसे ‘उद्योग का दर्जा दिये जाने की मांग की है। इसके साथ ही क्षेत्र ने आवास ऋण के ब्याज भुगतान पर मिलने वाली कर छूट मौजूदा दो लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपये के ब्याज तक करने का भी आग्रह किया है।  रीयल एस्टेट क्षेत्र के प्रमुख संगठन ‘नेशनल रीयल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल – (नारेडको)के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने सरकार को सौंपे बजट पूर्व ज्ञापन में कहा है, ‘रीयल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा मिलने से काफी सहूलियत होगी। बड़ी नामी कंपनियां इस क्षेत्र में आयेंगी और कापरेरेट संस्कृति तथा अनुशासन इसमें आयेगा जिसका लाभ समग्र अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सबसे ज्यादा ग्राहकों को मिलेगा।  जैन ने कहा कि उद्योग का दर्जा नहीं होने से रीयल एस्टेट क्षेत्र को बैंकों तथा दूसरे संस्थानों से कर्ज लेने में काफी मुश्किलें होतीं हैं। वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं होने से क्षेत्र के हालात काफी खराब होते जा रहे हैं। मांग कम होने से पूंजी घट रही है और निवेशकों तथा खरीदारों का भरोसा भी लगातार कम होता जा रहा है। नारेडको अध्यक्ष ने आवासीय क्षेत्र को ढांचागत क्षेत्र का दर्जा देने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी यह मांग काफी पुरानी है। आयकर कानून की धारा 80 आईए के तहत ढांचागत क्षेत्र का दर्जा मिलने से संसाधन जुटाने में सहूलियत होगी। जैन ने आवास क्षेत्र में मांग बढ़ाने के लिये आवास ऋण के ब्याज पर मिलने वाली आयकर छूट की सीमा को मौजूदा दो लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपये करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा इसके साथ ही कर्ज लेने के साल से तीन साल के भीतर मकान के अधिग्रहण अथवा उसके पूर्ण होने की शर्त को भी समाप्त कर देना चाहिये। इससे आवासीय क्षेत्र को काफी प्रोत्साहन मिलेगा।