किसानों के जबरदस्त उत्साह और भागीदारी से ऐतिहासिक साबित हो रहा राष्ट्रीय कृषि मेला

: स्टालों में नहीं थी पैर रखने की जगह : मेले में खेती-किसानी से संबंधित जानकारियों का खजाना
राष्ट्रीय कृषि मेले का आज आखिरी दिन
रायपुर, 28 दिसम्बर(एनपी)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जोरा गांव में चल रहे राष्ट्रीय कृषि मेला छत्तीसगढ़ 2015 में किसानों के लिए खेती-किसानी से संबंधित जानकारियों का खजाना है। प्रदेश भर के किसान आज मेले के दूसरे दिन भी कृषि, पशुपालन, मछली पालन, उद्यानिकी और उससे जुड़े विभागीय स्टालों तथा कृषि उपकरणों, कृषि आदानों से संबंधित निजी कम्पनियों के स्टालों में जाकर पूरी सजगता से हर बात की बारीक जानकारी लेते दिखे। मेले में किसानों की जबरदस्त भागीदारी के कारण स्टालों में पैर रखने की जगह भी नहीं थी। स्टालों में किसानों का तांता लगा रहा। छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित राष्ट्रीय कृषि मेला ऐतिहासिक साबित हो रहा है।
मेले में कृषि उपज मण्डी बोर्ड, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ कामधेनू विश्वविद्यालय, बीज प्रमाणिकरण संस्था, अभियांत्रिकी विभाग, ग्रामोद्योग विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, राज्य गौसेवा आयोग, छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, जैविक खेती मिशन, बीज विकास निगम सहित अन्य निजी संस्थाओं के 150 स्टाल लगे हुए हैं। मेले में आए किसान स्टालों में पहुंचकर पूरी गंभीरता से जानकारी लेते रहे। प्रदेश के विकासखण्डों से दलों के रूप में आए किसान सामूहिक रूप से स्टालों में जाकर अपनी-अपनी रूचि के अनुसार खेती-किसानी के उन्नत और आधुनिक तरीकों के बारे में स्टालों में उपस्थित लोगों से बेझिझक पूछते रहे। छोटे-बड़े कृषि उपकरण और यंत्र बनाने वाली निजी संस्थाओं के स्टालों में जाकर किसान इनके संचालन प्रक्रिया और उपयोगिता के बारे में जानकारी ले रहे थे। मेले के प्रति किसानों का उत्साह देखते ही बन रहा था। हर किसान के हाथ में प्रचार साहित्यों का बण्डल देखने को मिला। मेले में आए सभी किसान प्रसन्नचित और उत्साहित नजर आ रहे थे। किसानों से चर्चा करने पर उन्होंने मेले को बहुत उपयोगी और खेती-किसानी के लिए ज्ञानवर्धक बताया। प्रदेश भर से किसानों का दल लेकर आए कृषि विभाग और उससे सम्बद्ध अधिकारी किसानों को मेला स्थल पर घूमा-घूमाकर उनका मार्गदर्शन करते रहे।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एक बड़े मण्डप में अनेक स्टाल लगाए गए हैं। विश्वविद्यालय के प्रमुख स्टाल छत्तीसगढ़ में पायी जाने वाली धान की दुर्लभ किस्मों की बालियों से बने झालरों से बड़े आकर्षक ढंग से सजा हुआ है। इस स्टाल में इन दुर्लभ प्रजातियों के धान बीज भी प्रदर्शित किए गए हैं। धान की खेती करने वाले किसान बड़े गौर से इन बीजों को देखकर अधिकारियों से जरूरी जानकारी लेते दिखे। छत्तीसगढ़ कामधेनू विश्वविद्यालय के स्टाल में पंचगव्य गौमूत्र से बनी औषधियों की प्रदर्शनी लगायी गयी है। पशुधन विकास विभाग के स्टाल में पशु पालकों के साथ अन्य किसानों का तांता हमेशा लगा रहा। मछली पालन विभाग के मण्डप में मछली पालन करने वाले किसान अधिकारियों से मछली पालन की बारीकियां जानने लगे हुए थे।
राष्ट्रीय कृषि मेले में विभिन्न फसलों बीजों के उपचार से लेकर बोनी, रोपाई, निन्दाई, कटाई, मिसाई तक के कृषि उपकरणों और यंत्रों की प्रदर्शनी मेले में लगायी गयी है। इस राष्ट्रीय मेले में छोटे-छोटे कृषि उपकरणों से लेकर बड़े यंत्रों की प्रदर्शनी लगी है। छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित इस राष्ट्रीय कृषि मेले का कल सोमवार को आखिरी दिन है।