विशेष लेख : सरस्वती साइकिल योजना बनी बालिका शिक्षा की संवाहक

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  • गरियाबंद जिले की बालिकाओं को मिली 27 हजार से अधिक साइकिले बिखरते सपने हुए साकार

बालक और बालिका शिक्षा में भेद-भाव को खत्म करने और पढ़ाई में बालिकाओं को समान अवसर प्रदान करने के एक बड़ी सोच का परिणाम है सरस्वती सायकल योजना। स्कूल जाने में सुविधाओं के अभाव में बालिकाएं कक्षा आठवीं के पश्चात स्कूल जाने के बजाय घर में रहकर ही अपने सपनों को मरते देखती थी, परंतु मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के एक अच्छी सोच के कारण सन् 2004 से बालिकाओं को सरस्वती सायकल योजना का उपहार मिला, इससे घर में रहकर अपने सपनों को बिखरते देखने वाली बालिकाओं को नया साधन मिला। आज बालिकाएं भी फर्राटे से सायकल चलाकर स्कूल तक पहुंच रही हैं और अपने सपनों को साकार कर रही हैं।
गरियाबंद जिले में सरस्वती साइकिल योजना के सफल क्रियान्वयन ने बालिका शिक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि की है। नवीन जिला गठन के पश्चात वर्ष 2012-13 से वर्तमान तक कुल 27046 साइकिल वितरित की जा चुकी है। इसमें अनुसूचित जाति वर्ग की बालिकाओं को 3 हजार 701, अनुसूचित जनजाति वर्ग की बालिकाओं को 9977 तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के बलिकाओं को 13 हजार 83 एवं सामान्य वर्ग के गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले 285 बालिकाओं को इस योजना के तहत लाभान्वित किया गया है।
गरियाबंद जिला एक ओर जहां नक्सलवाद से प्रभावित है, वहीं दूसरी ओर तीव्रता से विकास की ओर अग्रसर है। विकास के मुख्य स्तंभ के रूप में शिक्षा में बुनियादी आवश्यकताओं को पूर्ण करना शासन की प्राथमिकता रही है। बालिकाओं में शिक्षा के प्रति रूचि को ध्यान में रखते हुए सरस्वती सायकल योजना हजारों बालिकाओं के सपनों की संवाहक बनी है। जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार आदिवासी विकासखण्ड छुरा में अब तक 6200, गरियाबंद में 4097 एवं मैनपुर विकासखण्ड में 4627 बालिकाओं को सरस्वती सायकल प्राप्त हुआ है।  अब इस अंचल की बेटियाँ भी बिना झिझक के साथ सायकल चलाकर स्कूल पहुंचती है।
ज्ञात है कि वर्ष 2004-05 के शिक्षा सत्र में जब इस योजना का शुभारंभ किया गया था, उस समय केवल 9वीं में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के छात्राओं को ही नि:शुल्क साइकिल प्रदान किया जाता था। किंतु शिक्षा सत्र 2008-09 से अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के अलावा अन्य समाज के सभी वर्गो के गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल प्रदान किया जा रहा है, जिसका असर स्कूली शिक्षा में साफ तौर पर देखा जा सकता है।