कैसे सऊदी अरब भारत के आर्थिक विकास को पहुंचा सकता है नुकसान

 

 नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमत भारत के आर्थिक विकास की रफ्तार को सुस्त कर सकती है। अभी कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों के मौजूदा स्तर से नीचे आने की संभावना कम है क्योंकि सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब की नजर इसे और ज्यादा बढ़ाने पर है। भारत के लिहाज से तेल की बढ़ती कीमत कतई अच्छी बात नहीं है खासकर तब जब सऊदी अरब दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते इस बाजार में 44 अरब डॉलर के रिफाइनरी प्रॉजेक्ट में शामिल होने जा रहा है।
भारत चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहे। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक इंटरव्यू में यह बात कही। इस बीच सऊदी अरब चाहता है कि कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहे। मोदी सरकार तेल के सस्ते होने का भरपूर फायदा उठा चुकी है लेकिन अब तेल की कीमतों में फिर से उछाल आना शुरू हो चुका है। यह ऐसे वक्त में हो रहा है जब सरकार 2019 के चुनावों की तैयारी में है। दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक सऊदी अरब अपनी सरकारी तेल कंपनी के लिए आईपीओ लाने की तैयारी है। सऊदी अरब तेल के उत्पादन पर लगाम लगाना चाहता है ताकि उसकी कीमतों में गिरावट न आए।

अपने कच्चे तेल की खपत सुनिश्चित करने के लिए ही सऊदी अरब भारत के रिफाइनरी प्रॉजेक्ट में निवेश करने जा रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी सऊदी अरामको महाराष्ट्र की 44 अरब डॉलर लागत वाली रिफाइनरी सह पेट्रोरसायन परियोजना में 50% हिस्सेदारी खरीदेगी। इसके लिए कंपनी ने बुधवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। 6 करोड़ टन क्षमता वाली इस रिफाइनरी से सऊदी अरामको को अपने 3 करोड़ टन कच्चे अतिरिक्त तेल का एक सुनिश्चित ग्राहक मिल जाएगा। नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मंच (IEF) के सम्मेलन से इतर इस संबंध में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। सऊदी अरामको इस परियोजना के लिए 50% कच्चे तेल की आपूर्ति करेगी। इस परियोजना में बाकी की हिस्सेदारी इंडियन ऑइल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रहेगी। अन्य मुख्य तेल उत्पादक देशों की तरह अरामको भी निवेश के सहारे दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देश में अपने ग्राहकों को पक्का करना चाहती है ताकि उसे कच्चे तेल का एक सुनिश्चित ग्राहक मिल सके। संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत भी इस तरह की परियोजनाओं में निवेश पर विचार कर रहे हैं।