ऐसे हैशटैग का न करें इस्तेमाल, खतरे में पड़ सकते हैं आपके बच्चे

Hashtags that can put your child in danger online
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आज की तारीख में पैरेंटिग का ना सिर्फ स्टाइल बदला है बल्कि पैरेंट्स अधिक से अधिक सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं. यही कारण है कि पैरेंट्स में भी शेयरिंग का क्रेज काफी बढ़ गया है. मम्मी-पापा बच्चों की तस्वीरें और वीडियो ऑनलाइन पोस्ट करते रहते हैं. हम सबको बच्चों की निजी जिंदगी की तस्वीरें जैसे पॉटी ट्रेनिंग, परिवार के साथ मस्ती या छुट्टियों की तस्वीरें देखने में जरूर काफी प्यारी लगती हैं लेकिन इसका गलत तरीके से इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

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एक रिर्सच की मानें तो 2 साल तक के 90% बच्चों की सोशल मीडिया पर मौजूदगी होती है. गैर संस्कारी संस्था चाइल्ड रेस्क्यू कोलिशन बच्चों के खिलाफ दरिंदगी फैलाने वालों को खोजने और गिरफ्तार करवाने में बच्चों की मदद करती है. यह गैर संस्कारी संस्था ‘ऑनलाइन बच्चों को ओवरएक्सपोज’ करने के संदर्भ में कैंपेन चलाएगी और पैरेंट्स को इसके तहत जागरूक किया जाएगा.

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‘किड्स फोर प्राइवेसी’ टाइटल के नाम से इस कैंपेन में 100 से अधिक हैशटैग को हाइलाइट किया है जिसमें #pottytraining #bathtime जैसे हैशटैग शामिल हैं. ये हैशटैग बच्चों का भविष्य खतरे में डाल सकते हैं. पैरेंट्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हैशटैग से बच्चों के खिलाफ दरिंदगी फैलाने वालों को आसानी से बच्चों की तस्वीरें मिल सकती है। इस कैपेंन में एनजीओ ने बच्चों की तस्वीर और हाथों से लिखा ‘प्राइवेसी प्लीज’ पकड़ने को कहा है.

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ऐसी उम्मीद जताई जा रही है ऐसी जागरुकता अभियान से पैरेंट्स समझेंगे कि बच्चों को भी प्राइवेसी का अधिकार है.चाइल्ड रेस्क्यू कोलिशन के चेयरमैन डेविड एंजलो ने एक बयान में कहा कि ‘पैरेंट्स भोलेपन में बच्चों की इंटिमेट तस्वीरें और जानकारियां सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते हैं. उन्हें नहीं पता होता है कि उन तस्वीरों का गलत तत्वों या यौन अपराधियों द्वारा स्क्रीनशॉट लिया या डाउनलोड किया जा सकता है और इन तस्वीरों का गलत तरीके से इस्तेमाल या इसे दूसरी साइट पर री-पोस्ट किया जा सकता है.’

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अक्सर पैरेंट्स बच्चों से जुड़ी जानकारियां भी सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते हैं. जैसे बच्चे का स्कूल में पहला दिन और स्कूल का नाम शेयर करना भी बच्चों के लिए खतरे से खाली नहीं है. आप सोच सकते हैं कि इससे आप बिना जाने किस हद तक बच्चों को खतरे में डाल रहे हैं.बच्चों की नग्न अवस्था में क्यूट तस्वीरों का भी यौन अपराधी गलत तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं. इसलिए हैशटैग के साथ-साथ कैसी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की जानी चाहिए ये भी बेहद जरुरी है.

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यह कैंपेन ना सिर्फ पैरेंट्स के बीच जागरूकता बढ़ाएगा बल्कि इससे लोगों में भी जागरूकता आएगी कि कैसे अपने बच्चों को सोशल मी़डिया पर आने वाले खतरों से सुरक्षित रखने की जरूरत है।सोशल मीडिया 5 साल से कम उम्र के बच्चों से जुड़ी अपराध काफी बढ़ रहे हैं और इसको ध्यान में रखकर चाइल्ड रेस्क्यू कोलिशन इसपर आधारित कैंपन चलाएगा।